यूके प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा
हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) भारत आए, और उनके साथ एक विस्तृत प्रतिनिधिमंडल था जिसमें व्यावसायिक, शैक्षिक और तकनीकी क्षेत्रों के दिग्गज शामिल थे।
प्रमुख विषय और समझौते
- भारत और यूके ने Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर जोर दिया, जिसे जुलाई 2025 में हस्ताक्षर किया गया था।
- इस दौरे के दौरान यूके प्रतिनिधिमंडल ने भारत में निवेश के अवसरों की खोज की।
- इस दौरे से यूके में करीब 10,600 नौकरियां सृजित होने का दावा किया गया।
- यूके ने भारत को हल्के मल्टी-रोल मिसाइल प्रणालियाँ (lightweight multirole missile systems) मुहैया कराने की योजना पर सहमति जताई।
- भारत और यूके ने तकनीकी सुरक्षा एवं नवाचार क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने के लिए पहल की, जैसे कि India–UK Connectivity and Innovation Centre और एक Joint AI Centre स्थापित करना।
- इस दौरे के दौरान यह घोषणा हुई कि Lancaster और Surrey विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसरों (campuses) खोलने की अनुमति दी जाएगी।
- कुल मिलाकर, ब्रिटेन अब भारत में सबसे बड़े शैक्षिक उपस्थिति (educational footprint) वाले देशों में से एक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- भारत और यूके ने तकनीकी सुरक्षा पहल (Technology Security Initiative, TSI) को आगे बढ़ाने की सहमति दी।
- दोनों देशों ने महत्वपूर्ण परियोजनाओं जैसे कि 6G नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, उभरती तकनीक (emerging technologies) आदि में साझेदारी बढ़ाने की योजना बनाई है।
यूके प्रतिनिधिमंडल के भारत दौरे के महत्व और चुनौतियाँ
- रणनीतिक साझेदारी को मजबूती
यह दौरा भारत-UK संबंधों को और अधिक रणनीतिक आयाम देने की दिशा में कदम है, न कि केवल व्यापारिक विषयों तक सीमित। - निवेश और विकास की प्रेरणा
द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में वृद्धि की उम्मीद है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुँचा सकती है। - शिक्षा एवं तकनीकी पुल
ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के भारत में विस्तार और अनुसंधान सहयोग भारतीय छात्रों व वैज्ञानिकों के लिए अवसर बढ़ाएगा। -
रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग
इस साझेदारी से भारत की सामरिक क्षमता और रक्षा उद्योग को भी लाभ हो सकता है।
-
विसा नीतियाँ और गतिशीलता
यूके ने स्पष्ट किया है कि इस दौरे में वीज़ा समझौते पर चर्चा नहीं की जा रही है।
यह भारत की मांगों और अपेक्षाओं के बीच अंतर को उजागर करता है।
- विभिन्न दृष्टिकोण और वैश्विक मतभेद
भारत और यूके के कुछ मतभेद हैं जैसे रूस-यूक्रेन विवाद में रुख आदि, जो साझेदारी को सीमित कर सकते हैं।
- क्रियान्वयन एवं समयसीमा
जितने समझौते किए गए हैं, उनका समय पर क्रियान्वयन और दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता इस साझेदारी की सफलता की कुंजी होगी।
कीर स्टार्मर के भारत दौरे के साथ यूके-भारत संबंधों ने एक नए मोड़ को छुआ है। यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक निवेश था — व्यापार, शिक्षा, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज। हालांकि, चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं, जैसे वीज़ा नीति, वैश्विक राजनीति और क्रियान्वयन की बाधाएं।
यदि ये कदम सही तरीके से लागू हुए, तो यह भारत और यूके दोनों के लिए एक “विन-विन” संबंध हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में और भी मजबूत बने।

0 Comments