बिहार चुनाव 2025 में NDA की जीत — मुख्य आंकड़े
NDA ने कुल 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
एनडीए का गठबंधन बहुत मजबूत रहा — यह मुकाबला महागठबंधन (MGB) से साफ झटका था।
NDA के अंदर प्रमुख दलों के बीच सीट वितरण यह रहा:
⦿ भारतीय जनता पार्टी (BJP): ~ 89 सीटें जीतीं।
⦿ जनता दल (यू) — JDU: ~ 85 सीटें।एनडीए की जीत के कारण / विश्लेषण
⦿ सीट-शेयरिंग स्ट्रैटेजी बहुत साफ रही — NDA ने पार्टनर्स के बीच संतुलित बंटवारा किया था, जिससे वोट बंटने की समस्या कम हुई।
⦿ विकास, महिला वोटरों की सक्रिय भागीदारी, और स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन NDA की वजह से बढ़त ले सका।⦿ Nitish Kumar-Modi “डबल इंजन” (राज्य + केंद्र) का एजेंडा एनडीए के लिए काम आया।
बिहार चुनाव 2025 में NDA की जीत – मुख्य जानकारियाँ
सीटों में झड़प
➱ बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं।
➱ NDA को लगभग 202 सीटें मिलीं।➱ BJP अकेले ही 89 (या बाद के अपडेट में ~91) सीटों पर जीत हासिल करने वाला सबसे बड़ा घटक बना।
➱ बहुमत के लिए 122 सीटों की ज़रूरत थी, लेकिन NDA ने 200 का आंकड़ा पार कर लिया — यह बहुत बड़ा जनादेश माना जा रहा है।
➱ इसके चलते NDA कट्टर बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में है।विजय के प्रमुख कारण
NDA की इस जीत के पीछे कई रणनीतिगत और सामाजिक-राजनीतिक कारण हैं:
⦿ “जंगल राज” की समस्या का रणनीतिक उपयोग
NDA ने सामाजिक गठजोड़ में परिपक्व रणनीति अपनाई। खासकर EBC (आर्थिक पिछड़े वर्ग), दलित और अन्य पिछड़ी जातियों को जोड़कर गठबंधन को मजबूत किया गया।
⦿ महिला मतदाताओं की भागीदारी
– महिला वोटरों ने बड़ी संख्या में मतदान किया। कई जिलों में महिलाओं की मतदान दर पुरुषों से 10-20 प्रतिशत अधिक थी।
– NDA ने महिलाओं के लिए कई कल्याण योजनाएँ चलाई थीं, जैसे “महिला रोजगार योजना” व अन्य कार्यक्रम, जिसने उनकी ओर भरोसा पैदा किया।
⦿ वेलफेयर स्कीम और नकद हस्तांतरण
NDA ने चुनाव से पहले महिलाओं को नकद हस्तांतरण (cash transfer) जैसी आर्थिक मदद दी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।
⦿ निर्वाचन रोल (Voter List) विवाद
SIR (Special Intensive Revision) के कारण मतदाता सूची में नामों की कटौती और जुड़ाव चर्चा में रही। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि इस दौरान कटौती का असर NDA के पक्ष में गया है।
⦿ युवा मतदाता
युवा मतदाताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, खासकर नए पंजीकृत वोटर्स।
⦿ विपक्ष की कमजोरियों
➤ महागठबंधन (RJD, कांग्रेस समेत) इस चुनाव में बहुत पिछड़ गया।
➤ RJD (तेजस्वी यादव की पार्टी) को बहुत कम सीटें मिलीं, जो पिछली बार की तुलना में बड़ी हार मानी जा रही है।➤ कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा।
➤ नई पार्टियाँ / रणनीतियाँ (जैसे प्रशांत किशोर की “जन सूराज” पार्टी) अपेक्षित प्रभाव नहीं बना पा रहीं।
राजनीतिक निहितार्थ (Implications)
➤ यह जीत NDA के लिए बहुमत + मज़बूत जनादेश साबित होती है, जिससे बिहार में उनकी राजनीतिक स्थिति बहुत मजबूत हो जाएगी।
➤ यह मोदी और नीतीश कुमार गठजोड़ को और सशक्त बनाती है, क्योंकि दोनों के बीच सहयोग ने चुनाव में अच्छा नतीजा दिया है।➤ महिलाओं और पिछड़ी वर्गों को ध्यान में रखते हुए जो रणनीति बनाई गई थी, वह सफल रही — इससे NDA को सामाजिक आधार में और विस्तार मिला है।
➤ विपक्ष (विशेष रूप से RJD) को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा, क्योंकि मौजूदा कोएलिशन और संदेश ने उन्हें भारी घाटे में डाल दिया।
नेतृत्व और भविष्य
➤ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि इस जीत में अहम रही।
➤ NDA की यह जीत भविष्य में अगले विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी स्थिति को मजबूत कर सकती है।➤ इसके साथ ही, यह जीत केंद्र में NDA सरकार के लिए भी एक तरह का मोलिक जनादेश (मंदिर) हो सकती है, क्योंकि बिहार का राजनीतिक और जनसंख्या-आधार दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
विपक्ष (महागठबंधन) की स्थिति
महागठबंधन (MGB) कुल 35 सीटों पर ही सीमित रहा।
महागठबंधन के अंदर के प्रमुख दलों की सीटें:
⦿ RJD: ~ 25 सीटें।
⦿ कांग्रेस: ~ 6 सीटें।
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